पितृ पक्ष श्राद्ध पूजा विधि

हिन्दू धर्म में मृत्यु के बाद श्राद्ध करना बेहद जरूरी माना जाता है। मान्यतानुसार अगर किसी मनुष्य का विधिपूर्वक श्राद्ध और तर्पण ना किया जाए तो उसे इस लोक से मुक्ति नहीं मिलती और वह भूत के रूप में इस संसार में ही रह जाता है।


वर्ष 2017 में पितृ पक्ष श्राद्ध की तिथियां निम्न हैं:

तिथि
दिन
श्राद्ध तिथियाँ
05 सितंबर
मंगलवार
पूर्णिमा श्राद्ध
06 सितंबर
बुधवार
प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध
07 सितंबर
गुरुवार
द्वितीया तिथि का श्राद्ध
08 सितंबर
शुक्रवार
तृतीया – चतुर्थी तिथि का श्राद्ध (एक साथ)
09 सितंबर
शनिवार
पंचमी तिथि का श्राद्ध
10 सितंबर
रविवार
षष्ठी  तिथि का श्राद्ध
11 सितंबर
सोमवार
सप्तमी तिथि का श्राद्ध
12 सितंबर
मंगलवार
अष्टमी तिथि का श्राद्ध
13 सितंबर
बुधवार
नवमी तिथि का श्राद्ध
14 सितंबर
गुरुवार
दशमी तिथि का श्राद्ध
15 सितंबर
शुक्रवार
एकादशी तिथि का श्राद्ध
16 सितंबर
शनिवार
द्वादशी तिथि का श्राद्ध
17 सितंबर
रविवार
त्रयोदशी तिथि का श्राद्ध
18 सितंबर
सोमवार
 चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध
19 सितंबर
मंगलवार
अमावस्या व सर्वपितृ श्राद्ध (सभी के लिए )
श्राद्ध क्या है? (What is Shraddh)
ब्रह्म पुराण के अनुसार जो भी वस्तु उचित काल या स्थान पर पितरों के नाम उचित विधि द्वारा ब्राह्मणों को श्रद्धापूर्वक दिया जाए वह श्राद्ध कहलाता है। श्राद्ध के माध्यम से पितरों को तृप्ति के लिए भोजन पहुंचाया जाता है। पिण्ड रूप में पितरों को दिया गया भोजन श्राद्ध का अहम हिस्सा होता है।
https://www.happynewyearsms.us/2017/09/Pitr-Shraddh.html

https://www.happynewyearsms.us/2017/09/Pitr-Shraddh.html

पितृ पक्ष का महत्त्व (Importance of Pitru Paksha)
ब्रह्म वैवर्त पुराण के अनुसार देवताओं को प्रसन्न करने से पहले मनुष्य को अपने पितरों यानि पूर्वजों को प्रसन्न करना चाहिए। हिन्दू ज्योतिष के अनुसार भी पितृ दोष को सबसे जटिल कुंडली दोषों में से एक माना जाता है। पितरों की शांति के लिए हर वर्ष भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण अमावस्या तक के काल को पितृ पक्ष श्राद्ध (Pitru Paksha) होते हैं। मान्यता है कि इस दौरान कुछ समय के लिए यमराज पितरों को आजाद कर देते हैं ताकि वह अपने परिजनों से श्राद्ध ग्रहण कर सकें।  
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